मन की शांति – Hindi Kahani

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मन की शांति

Hindi Kahani – हिंदी प्रेरक कहानियाँ 


स्वामी विवेकानंद एक बार अपने शिष्य मोहन के साथ कहीं जा रहे थे। जंगल में काफी चलने के बाद दोपहर में एक पेड़ के नीचे विश्राम को रुके और उन्हें प्यास लगी।

मोहन पास स्थित पहाड़ी झरने पर पानी लेने गया, लेकिन झरने से अभी-अभी कुछ पशु दौड़कर निकले थे जिससे उसका पानी गंदा हो गया था। पशुओं की भाग-दौड़ से झरने के पानी में कीचड़ ही कीचड़ और सड़े पत्ते बाहर उभरकर आ गए थे। गंदा पानी देख मोहन पानी बिना लिए लौट आया।

उसने स्वामी जी से कहा कि झरने का पानी साफ नहीं है, मैं पीछे लौटकर नदी से पानी ले आता हूं। लेकिन नदी बहुत दूर थी तो स्वामी जी ने उसे झरने का पानी ही लाने को वापस लौटा दिया।

मोहन थोड़ी देर में फिर खाली लौट आया। पानी अब भी गंदा था पर स्वामी जी ने उसे इस बार भी वापस लौटा दिया। कुछ देर बार जब तीसरी बार मोहन झरने पर पहुंचा, तो देखकर चकित हो गया। झरना अब बिलकुल साफ और शांत हो गया था, कीचड़ बैठ गया था और जल बिलकुल साफ हो गया था।

स्वामी विवेकानंद ने उसे समझाया कि

यही स्थिति हमारे मन की भी है। जीवन की दौड़-भाग मन को भी विक्षुब्ध कर देती है, मथ देती है। पर कोई यदि शांति और धीरज से उसे बैठा देखता है रहे, तो कीचड़ अपने आप नीचे बैठ जाता है और सहज साफता का आगमन हो जाता है


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