संत की महानता | Hindi Story on Greatness

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Greatness Hindi Story
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संत की महानता

Hindi Story on Greatness – Hindi Stories


एक परम विरक्त संत की दूर-दूर तक ख्याति थी। वे पूर्ण समर्पित भाव से जंगल में रहकर साधना करते तथा वहाँ के वनवासियों के बच्चों को कहानियाँ सुनाकर प्रेरित करने में समय बिताते थे।

सिकन्दर ने उनकी ख्याति सुनी तो वह दर्शन के लिए लालायित रहने लगा। एक दिन सिंधु नदी के तट पर घूमते-घूमते सिकन्दर ने बालू रेत पर बैठकर साधनारत संत को देखा।

झुककर प्रणाम करने के बाद वह हाथ जोड़कर बोला-‘महाराज, मैं आपकी सेवा करना चाहता हूं। स्वीकृति दीजिए’

संत के पास खड़े सिकन्दर की छाया से उनकी साधना में व्यवधान आ गया। वे बोले-‘यदि तुम मेरी सेवा करना चाहते हो तो तुरंत यहाँ से चले जाओ। साधना-चिंतन में बाधा न डालना ही तुम्हारी मेरे प्रति सच्ची सेवा है।

सिकन्दर संत जी की महान विरक्तता के प्रति नतमस्तक हो उठा। उसने कुछ दूर जाकर संत के पदचिह्नों की रेत को सिर से लगा लिया


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