अनेक बिमारियों का रामबाण ईलाज है दालचीनी : Health Benefits of Cinnamon in Hindi

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Health Benefits of Cinnamon in Hindi
Health Benefits of Cinnamon in Hindi

अनेक बिमारियों का रामबाण ईलाज है दालचीनी : Health Benefits of Cinnamon in Hindi

Health Benefits of Cinnamon in Hindi


 दालचीनी के फायदे

दालचीनी जीनस सिनामोन के पेड़ों की भीतरी छाल है। यह एक मसाला ही नहीं औषधि भी है। यह खाने में जायका बढ़ाने के साथ-साथ मोटापे से लेकर डायबिटीज तक कई समस्‍याओं का समाधान करती है

दालचीनी विश्व में मसालों के रूप में काम में ली जाती है। यह एक पेड़ की छाल होती है।

दालचीनी दो प्रकार की होती है :
मोटी दालचीनी : दालचीनी लघु, गर्म, तीखी, मधुर, कटु, रूक्ष और पित्तकारक होती है। यह बलगम, गैस, खुजली, अरुचि नाशक एवं दिल के रोग, मूत्राशय के रोग, बवासीर, पेट के कीड़े, पीनस (पुराना जुकाम) मिटाने वाली तथा वीर्य बढ़ाने वाली होती है।

पतली दालचीनी : यह मधुर, कड़वी, तीखी, सुगंधित, वीर्यवर्द्धक, शरीर के रंग को सुधारने वाली, वायु, पित्त, मुंह की सूजन और प्यास को मिटाती है।

विभिन्न भाषाओं में नाम :

हिन्दी दालचीनी
संस्कृत त्वक
बंगला दारूचीनी
मराठी तज, दालचीनी, पूहरचक
गुजराती तज, बेल बालची
तमिल कारुया
तेलगू सानलिप्पु
अरबी दारचीनी
फारसी दारचीनी, किर्फा
कन्नड़ लवंग पट्टे

रंग : दालचीनी हल्का लालपन लिए हुए भूरे रंग की होती है।

स्वाद : इसका स्वाद तीखा, मीठा और सुगंधित होता है।

स्वरूप : दालचीनी के पेड़ सिंहल, मालाबार आदि प्रदेशों में होते हैं। इसके पत्ते तमाल के पत्तों के जैसे होते हैं। पत्तों को सुंघाने से लौंग जैसी गंध आती है। इसका फूल गुलाब के फूल के समान महकता है। इसके फल करौन्दे के जैसे होते हैं। इनमें से तेल निकलता है। इसके फूलों का इत्र (परफ्यूम) भी बनाया जाता है।

स्वभाव : इसकी तासीर गर्म होती है।

तुलना : तज से दालचीनी की तुलना की जा सकती है।

 दालचीनी के औषधीय गुण निम्न हैं : Health Benefits of Cinnamon in Hindi

दालचीनी मन को प्रसन्न करती है। सभी प्रकार के दोषों को दूर करती है। यह पेशाब और मैज यानी की मासिक-धर्म को जारी करती है। धातु को पुष्ट करती है। मानसिक उन्माद यानी कि पागलपन को दूर करती है। इसका तेल सर्दी की बीमारियों और सूजनों तथा दर्दो को शान्त करता है। सिरदर्द के लिए यह बहुत ही गुणकारी औषधि होती है।

            दालचीनी हल्की सी कड़वी व मीठी, सुगन्धित, वीर्यवर्द्धक (वीर्य बढ़ाने वाली) त्वचा के रंग में सुन्दरता बढ़ाने वाली, वात-पित्त नाशक, मुंह का सूखना और प्यास को कम करने वाली होती है।

            पालक ठण्डा होता है। पालक में दालचीनी डालने से इसकी ठण्डी प्रकृति बदल जाती है। इसी प्रकार दूसरे ठण्डे पदार्थों की प्रकृति बदल जाती है। इसी प्रकार अन्य शीतल पदार्थों की प्रकृति दालचीनी डालकर बदल सकते हैं।

            दालचीनी पित्त शामक होती है। यह अपनी गर्मी और तीक्ष्णत: के कारण गुर्दों, स्नायुविक संस्थान और दिल को उत्तेजित करती है। दालचीनी संकोचक और बाजीकरण होने से स्त्री, पुरुषों के यौनांगों (जननांग) के लिए लाभदायक होता है। यह गर्भवती स्त्री के लिए हानिकारक होती है। गर्भवती स्त्रियों को इसे नहीं लेना चाहिए अथवा कम मात्रा में लेना चाहिए।

दालचीनी की उत्तम गुणवत्ता की पहचान :

            जो दालचीनी, पतली, मुलायम चमकदार, सुगंधित और चबाने पर तमतमाहट एवं मिठास उत्पन्न करने वाली हो, वह श्रेष्ठ होती है।

 दालचीनी का सेवन कैसे करें? दालचीनी क़े खास प्रयोग :

दालचीनी मसालों के रूप में काम में ली जाती है। दालचीनी का तेल बनता है। यह मिठाइयों में सुगंध देने के काम आती है। दालचीनी, साबुन, दांतों के मंजन, पेस्ट, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक के रूप में काम में आती है। दालचीनी, संकोचक, स्तम्भक, कीटाणुनाशक, वातनाशक, फफून्दनाशक, जी मिचलाना और उल्टी रोकने वाली, पेट की गैस दूर करने वाली है। चाय, कॉफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वादिष्ट हो जाती है तथा जुकाम भी ठीक हो जाता है।

दालचीनी का तेल :

            दालचीनी से बना यह तेल उत्तम गुण वाला होता है। यह मेडिकल स्टोरों पर उपलब्ध होता है। इस तेल में दालचीनी जैसी गंध व स्वाद होती है। दालचीनी का नया तेल हल्का पीला तथा पुराना होने पर लाल से भूरे रंग का हो जाता है। दालचीनी का तेल भारी और गरिष्ठ होता है जो पानी में डालने पर डूब जाता है। दालचीनी में 2 प्रतिशत तेल होता है जो उड़नशील होता है। इस तेल में गोंद सिनेमिक एसिड, राल, टैनिन, शर्करा, स्टार्च, भस्म, आदि द्रव्य मिलते हैं। दालचीनी का तेल दर्द, घावों और सूजन को नष्ट करता है।

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