फर्ज | Hindi Story on Duty

1
377
Hindi Story Duty
Hindi Story Duty

Read Hindi Story Duty

फर्ज

Hindi Story on Duty – Hindi Stories


राजा देवीसिंह अपनी रियासत के गाँवों का भ्रमण कर रहे थे। उन्होंने गाँव के जंगल में एक वयोवृद्ध व्यक्ति को आम का पौधा रोपने की तैयारी करते देखा।

बूढ़ा खुरपी से जमीन में गड्ढा खोद रहा था। भीषण गरमी के कारण उसका शरीर पसीन से तर हो रहा था। राजा ने उसके पास अपना घोड़ा रोका तथा उतरकर पूछा,

बूढ़े दादा, तुम वृद्धावस्था में आम का पौधा रोपने के लिए परिश्रम कर रहे हो। क्या तुम समझते हो कि जब तक आम का यह पौधा पेड़ बनेगा तब तक इसके फल खाने के लिए तुम जीवित रहोगे?’

बूढ़े ने खुरपी जमीन पर रख दी और हाथ जोडकर बोला, ‘महाराज, दूसरे लोगों ने वर्षों पहले जो पौधे रोपे, उनके पेड़ बनने के बाद उनके फल मैं खाता आ रहा हूं। क्या यह मेरा फर्ज नहीं है कि मैं भी उसी प्रकार के वृक्ष लगाऊँ,

जिससे आने वाली पीढ़ी मेरी तरह मीठे फल खा सके?’ राजा बूढ़े के उत्तर को सुनकर खुश हो गए। वे मन ही मन कर्त्तव्यनिष्ठ वृद्ध के प्रति नतमस्तक हो उठे

कहनी की शिक्षा – भगवान ने हर किसी को अपना फर्ज निभाने की क़ाबलियत दी है हमें दूसरों के प्रति अपना फ़र्ज़ जरुर निभाना चाहिए 


आपको यह कहानी कैसी लगी कृप्या comment करके हमें जरुर बताएं….. आपका जीवन खुशियों से भरा रहे…

If you like This Hindi Story Duty, its request to kindly share with your friends on FacebookGoogle+Twitter, and other social media sites

यह भी पढ़े : सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली हिंदी कहानियाँ :

पढ़े कहानियों का विशाल संग्रह : 

1 COMMENT

LEAVE A REPLY