सात पैसे | Hindi Story on Donation

सात पैसे | Hindi Story on Donation

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Donation Hindi Stories

सात पैसे

Hindi Story on Donation – Hindi Stories


पटना राज्य में स्थित जैनियों के तीर्थ का जीर्णोद्धार किया गया। उसमें होने वाले खर्च की पूर्ति के लिए दानियों में धन देने को होड़ लग गई। अपनी-अपनी क्षमता से बढ़कर सेठ लोग इस पुनीत कार्य में धन दे रहे थे। सभी चाहते थे कि राज्य के मंत्री दानियों की सूची में सबसे ऊपर उसका नाम अंकित करें

राज्य के महामंत्री ने तीर्थ के जीर्णोद्धार में योगदान करने वालों की सूची में सबसे पहला नाम भीमा नाम के मजदूर का घोषित किया जिसने अपनी कमाई के सात पैसे दान किए थे। नगर सेठों ने इस पर आक्रोश व्यक्त किया

मंत्री ने उन्हें समझाया-‘राजा ने, मैंने तथा आप लोगों ने अपनी-अपनी कमाई का कुछ भाग ही इस कार्य के लिए दान दिया, जबकि भीमा ने कई दिनों तक अपने खून-पसीने से की गई मजदूरी के बदले मिले सात पैसे दान में दिए। क्या उसके खून पसीने से पैदा सात पैसे के आगे आपका धन कहीं ठहर पाता है?’

सभी सेठों ने मजदूर भीमा के दान के महत्व को सिर झुकाकर स्वीकार किया

कहनी की शिक्षा – दान किस भाव से दिया गया है यह महत्त्व रखता है बल्कि इसके की कितना दिया गया है 


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