सच्चा सौदा | Hindi Story on Guru Nanak

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सच्चा सौदा

Hindi Story on Guru Nanak – Hindi Stories


कालू मेहता ने अपने पुत्र नानक को तलवंडी (लाहौर) में एक छोटी-सी दुकान खुलवाई। उन्होंने बेटे को कुछ रुपये दिए तथा बोले-‘पहली बार अकेले बाजार भेज रहा हूँ, ठोक-बजाकर खरा सौदा करके लौटना।’

नानक बचपन से ही भगवन्नाम की मस्ती में डूबे रहते थे। उन्हें भूखे व परेशान लोगों में भगवान के दर्शन होते थे। वे तलवंडी से कुछ दूर पहुंचे थे कि उन्हें कुछ साधु मिल गएएक साधु बोला-‘बच्चा हम कई दिन से भूखे हैं, कुछ मिल जाए तो अपना पेट भर लें। ‘

नानक ने वे तमाम रुपये उन साधुओं के भोजन पर खर्च कर दिए तथा कुछ देर उनके बीच बैठ कर भगवान की चर्चा की और खाली हाथ ही घर लौट आए।

पिता ने जब बेटे को खाली हाथ वापस आया देखा तो क्रोध में भरकर बोले- मैंने तो तुम्हें सामान लाने के लिए भेजा था, खाली हाथ कैसे आ गए? मैने जो रुपये तुम्हें दिए थे वे कहाँ हैं? ‘

पिताजी आपने मुझसे खरा सौदा करने को कहा था। भूखे साधुओं को भोजन कराकर उन्हें तृप्त करने से खरा सौदा और क्या हो सकता था। मैंने वे रुपये ऐसे सोदे  खर्च किए हैं, जिनसे इस जीवन में भी कल्याण होगा और परलोक में भी।’

नानक का उत्तर सुनकर कालू मेहता समझ गए कि उनका बेटा साधारण संसारी आदमी नहीं है, कोई महान फरिश्ता है।

यही नानक आगे चलकर सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक कहलाए

कहनी की शिक्षा – 


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