कलियुग का वास | Hindi Story on Kalyuga

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Kalyuga Hindi Stories

कलियुग का वास

Hindi Story on Kalyuga – Hindi Stories


महाराजा परीक्षित कुरुक्षेत्र तीर्थ की यात्रा करने गए। वहाँ वे एक अपंग को देखकर द्रवित हो उठे बैल के तीन पैर टूटे हुए थे तथा उसके पास कृशकाय दीनहीन गाय बैठी हुई थी। एक भयानक आकृतिवाला राक्षस पास खड़ा हुआ था। जिसे देखकर दोनों थर-थर काँप रहे थे।

महाराजा महान ज्ञानी तथा राजर्षि थे। उन्हें समझते हुए देर न लगी कि धर्म रूपी बैल के चार-चरण-तप दया, सत्य और दान में से तीन चरण टूट चुके हैं। वह इस समय केवल सत्य रूपी चौथे चरण पर खड़ा है।

“कलियुग” राक्षस के भेष में पास खड़ा अंतिम चरण सत्य को भी ग्रस लेने के लिए आतुर है

महाराजा परीक्षित इसे सहन नहीं कर पाए। उन्होंने कलिकाल को चुनौती देते हुए अपने धनुष पर बाण चढ़ा लिया। उन्होंने सीधे हाथ में तलवार उठाई तथा कलिकाल की ओर झपटे।

कलिकाल अभिमन्यु पुत्र के शौर्य से परिचित था। वह तुरंत उनके चरणों में गिर गया तथा बोला – आखिर महाराज आप प्रजापालक हैं, मुझे भी तो राज्य में रहने का अधिकार है।

“मेरे राज्य में अन्याय, अत्याचारा तथा परपीड़क नहीं रह सकता। तू अधर्म का प्रतीक है अत: मैं तुझे धर्मात्माओं पर अत्याचार करने की छूट कैसे दे सकता हूँ?’ महाराज परीक्षित ने कहा

‘तो फिर महाराज मैं कहाँ जाऊँ, कहाँ स्थिर रहूँ?’ कलिकाल गिड़गिड़ा कर बाला।

तुम्हारे लिए जुआ, मद्यपान, स्त्री प्रताड़ना तथा हिंसा -ये चार वृत्तिवाले स्थान हैं। तुम इन वृत्तियों से युक्त लोगों के बीच रहो। – परीक्षित ने उसे समझाया।

महाराज – मुझे कोई एक ऐसा स्थान बता दें, जहाँ ये चारों अधर्म एक साथ हों तथा मैं वहाँ स्थायी रूप से रह सकू – कलिकाल ने प्रार्थना की।

वह स्थान ‘स्वर्ण’ होगा। इस स्वर्ण में ऐश्वर्य-धन की लिप्सा, असत्य, मद, काम, घृणा, असहिष्णुता हिंसा आदि तमाम पाप एक साथ बसते हैं। जाओ तुम स्वर्ण में वास करने के लिए स्वतंत्र हो।’ परीक्षित ने उसे समझाया।

और महाराजा परीक्षित की यह चेतावनी सत्य सिद्ध हुई। कलियुग में मद्य, हिंसा स्त्री उत्पीड़न असत्य आदि के कारण ही अधिकांश अपराध व पाप कर्म होते है


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