प्रायश्चित्त का फल | Hindi Story on Propitiation

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Hindi Stories Propitiation

प्रायश्चित्त का फल

Hindi Story on Propitiation – Hindi Stories


स्वामी दयानंद सरस्वती पंजाब में धर्मप्रचार कर रहे थे। झेलम में उनका प्रवचन चल रहा था। वे गृहस्थजनों को सात्विक जीवन बिताने तथा ईमानदारी से कमाई करने की प्रेरणा दे रहे थे। उनके प्रवचन के बाद वहाँ के एक व्यक्ति ने भजन सुनाने की इच्छा व्यक्त की। उसके सुंदर भजन को सुनकर न केवल श्रोता अपितु स्वामी जी भी झूम उठे।

सभा समाप्त होने के बाद जब वह व्यक्ति चला गया तो किसी ने स्वामी जी को बताया-जिस व्यक्ति ने भजन गाया था, वह यहाँ तहसीलदार के पद पर है। भजन तो उसने बहुत सुंदर सुनाया, परंतु वह है चरित्रहीन व भ्रष्ट। अपनी पत्नी त्यागकर रखैल रखी हुई है। प्रतिदिन शराब व मांस का सेवन करता है। रिश्वत लेता है – यह सुनकर स्वामी जी गंभीर हो गए

अगले दिन प्रवचन में वह व्यक्ति पुन: आया तथा भजन सुनाने की इच्छा व्यक्त की। स्वामी जी ने उसे भजन सुनाने की स्वीकृति दे दी। भजन की समाप्ति के बाद स्वामी जी ने कहा – ‘अमीचंद तुम हो तो हीरे, पर कीचड़ में धसे हो,

तुम्हारे हृदय में प्रभु के प्रति श्रद्धा है, तुम्हारे शब्दों में भी आकर्षण है परंतु जब तक तुम व्यक्तिगत जीवन को दुर्गुणों से मुक्त नहीं करोगे तुम्हारा भजन सुनाना व्यर्थ है।’

स्वामीजी के चंद शब्दों ने अमीचंद का जीवन बदल दिया। उसने घर पहुंचते ही शराब की बोतल तोड़ डाली। अगले ही दिन पत्नी को प्रेमपूर्वक अपना लिया रिश्वत न लेने का संकल्प ले लिया।

आगे चलकर वे ‘महता अमीचंद’ के नाम से भजन गायक के रूप में प्रसिद्ध हो गये

कहनी की शिक्षा – जो व्यक्ति अपने पापों का प्रायश्चित्त कर लेता है और सद्मार्ग पर चलता है उसके सारे पाप धुल जाते है


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