सच्ची सेवा और त्याग | Hindi Story on Sacrifice

0
360
Hindi Stories

सच्ची सेवा और त्याग

Hindi Story on Sacrifice – Hindi Stories


महाराष्ट्र के रोजन नगर में एक ब्राह्माण रहता था। वह क्रोधी स्वभाव का होने के कारण अपनी पत्नी से लड़ता-झगड़ता रहता था। क्रोध में आकर वह पत्नी को धमकी देता, ‘मेरी बात नहीं मानेगी, तो घर-बार त्यागकर संत संतोबा पंवार का
शिष्य बन जाऊँगा।

एक दिन ब्राह्माण की अनुपस्थिति में संत संतोबा जी भिक्षा माँगने उसके घर आ पहुँचे ब्राह्माण की पत्नी ने संत जी को बताया कि पति बात-बात पर झगड़ा कर आपका शिष्य बन जाने की धमकी देता रहता है।

संत जी मुस्कुराकर बोले- बेटी, अब कभी वह झगड़ा करे तो कह देना कि घर छोड़ जाओ। बन जाओ शिष्य संतोबा जी के मैं उसे ऐसा मंत्र फुक दूंगा कि फिर वह घर छोड़ने की धमकी नहीं देगा’

अगले दिन ब्राह्मण घर आया। भोजन तैयार होने में विलंब देखा तो उसने पत्नी से झगड़ते हुए कहा, ‘मैं घर छोड़कर बाबा जी बन जाऊँगा तू अकेली दुर्दशा को प्राप्त होगी।’ पत्नी ने उत्तर दिया, ‘इसी समय घर छोड़कर बाबा जी बन जाओ।’

ब्राह्मण बड़बड़ाता हुआ घर से जंगल की ओर चल दिया। संत संतोबा जी के आश्रम में पहुँचकर बोला, ‘महाराज, मुझे वैराग्य हो गया है। मैं गृहस्थ का झंझट त्यागकर आपकी शरण में आया हूं। मुझे अपना शिष्य बना लीजिए।’ संत जी ने
उसे कुटिया में रहने की आज्ञा दे दी।

सवेरे नदी में स्नान के बाद संतोबा जी ने कहा’अपने कपड़े त्यागकर लंगोटी धारण कर लो।’ उसने कपड़े उतार दिए। वह ठंड में ठिठुरने लगा। संत जी ने उसे दोपहर के समय कंदमूल खाने को दिए। स्वादहीन कंदमूल का एक टुकड़ा भी
वह गले से नीचे नहीं उतार पाया।

पत्नी के साथ वह प्राय: भोजन में स्वाद न होने की शिकायत लेकर ही झगड़ता था। कदमूल न खा सकने के कारण वह भूख से बिलखने लगा।
संतोबा जी उसके हृदय की पीड़ा को समझ गए। बोले’वत्स, वैराग्य का पहला पाठ जिह्वा के स्वाद पर नियंत्रण करना है। तुम पहले पाठ के पहले ही दिन रोने लगे तब संत कैसे बनोगे?’

उन्होंने ब्राह्मण को समझाते हुए कहा, ‘अपने घर लौट जाओ। परिवार में पत्नी-बच्चों के साथ प्रेमपूर्वक रहते हुए भगवान का भजन करो अपने हाथों से दूसरों की सेवा करो तुम्हें सद्गृहस्थ संत के रूप में ख्याति प्राप्त होगी।’
संत की सीख ने उसका जीवन बदल दिया। आगे चलकर वह संत नरोत्तम राव के नाम से विख्यात हुआ।

कहनी की शिक्षा – सच्ची सेवा और त्याग वैराग्य में नहीं गृहस्थ में है 


आपको यह कहानी कैसी लगी कृप्या comment करके हमें जरुर बताएं….. आपका जीवन खुशियों से भरा रहे…

यह भी पढ़े : सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली हिंदी कहानियाँ :

LEAVE A REPLY