समय का प्रभाव | Hindi Story on Time

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Time Hindi Stories

समय का प्रभाव

Hindi Story on Time – Hindi Stories


महाराजा युधिष्ठिर ‘धर्मराज थे। उनकी प्रजा भी धर्मात्मा थी। उनके राज्य में एक वैश्य ने अपना मकान ब्राह्माण को बेचा। ब्राह्मण ने उस पुराने मकान को गिरवा कर नया बनवाना शुरू किया नींव खोदी जा रही थी कि राज-मिस्त्रियों को जमीन
में एक घड़ा दिखाई दिया। घड़े में सोने की मोहरें भरी हुई थीं।

ब्राह्माण मोहरों से भरे घड़े को लेकर वैश्य के घर पहुंचा। उसने कहा, ‘लाला जी, यह घड़ा आपके मकान की जमीन में गड़ा हुआ था। इसमें सोने की मोहरें हैं। ये आपकी हैं, आपको वापस करने आया हूं।

वैश्य ने हाथ जोड़कर कहा,‘पटिल जी, मैंने आपको अपना मकान बेच दिया था, उसके स्वामी आप बन गए उसकी जमीन से निकली इन मोहरों पर आपका अधिकार है। मै इन्हें कैसे ले सकता हूं?

ब्राह्मण ने कहा, ‘सेट जी मैन आपसे केवल मकान खरीदा था, उसकी जमीन में दबा धन नहीं। अब जमीन से निकली इन मोहरों का मालिक मैं कैसे हो सकता

दोनों सोने की मोहरों से भरे घड़े को लेने को तैयार नहीं हो रहे थे। अंत में किसी तीसरे व्यक्ति की सलाह पर घड़ा राजकोष में जमा करा दिया गया

महाराजा युधिष्ठिर तक जब ईमानदारी की इस घटना की खबर पहुँची तो उन्होंने भीम से कहा – देखो मेरे राज्य के लोग कितने ईमानदार हैं?’

भीम यह सुनकर मुस्कुराए तथा बोले, ‘महाराज़ यह द्वापर युग का प्रभाव है। छह माह बाद कलियुग आएगा। तब देखना प्रजा की नीयत कैसे बदलती है।’

पूरे छह माह बाद वैश्य और ब्राह्मण युधिष्ठिर के दरबार में पहुंचे, दोनों झगड़ रहे थे कि राजकोष में जमा कराए गए मोहरों से भरे घड़े पर उनका अधिकार है। ब्राह्मण का कहना था कि जब मैंने मकान खरीद लिया तो उसकी जमीन के अंदर जो भी है वह मेरा है। दूसरी ओर वैश्य का दावा था कि उसने मकान ही बेचा था। जमीन के अंदर दबाया गया धन उसके पूर्वजो का होने के कारण उस पर उसका अधिकार है।

महाराजा युधिष्ठिर ने दोनों से पूछा कि छह महीने पहले तो तुम दोनों इस घड़े को लेने से इनकार कर रहे थे, अब क्या बात हो गई?

पास बैठे भीम ने कहा – महाराज उस समय इन दोनों की बुद्धि ठीक थी, अब कलिकाल के प्रभाव से दोनों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। दोनों की नीयत में अंतर आ गया है। यह सब समय का प्रभाव है।

कहनी की शिक्षा – 


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