Jai Mangla Devi Temple Begusarai History in Hindi : Jai Mangla Garh

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Jai Mangla Devi Temple Begusarai History in Hindi
Jai Mangla Devi Temple Begusarai History in Hindi

Jai Mangla Devi Temple Begusarai History in Hindi : Jai Mangla Garh


बिहार के बेगूसराय जिला मुख्यालय से लगभग 22 कि.मी. उत्तर जय मंगला गढ़ में एक इतिहास प्रसिद्ध अति प्राचीन मंदिर है-जयमंगलागढ़। यहाँ पर जयमंगला देवी की मूर्ति विराजमान है। यह मूर्ति काले पत्थर की अर्द्धनिर्मित एवं एक पैर पर खड़ी है। यह एक जाग्रत् स्थान एवं सिद्ध शक्तिपीठ है, जो देश भर के हिंदुओं तांत्रिकों, इतिहासों एवं पुरातत्वविदों का ध्यान बरबस अपनी ओर खींचता है। प्रत्येक मंगलवार को हजारों श्रद्धालु मंगला देवी के दर्शन-पूजन को आते हैं। यहाँ की प्राकृतिक सुषमा अनुपम है।

कहते हैं, पहले यह गढ़ प्राकृतिक सुषमा से अलंकृत था। गढ़ के चारों ओर काबड़ झील थी। झील में कमल के बड़े-बड़े फूल खिलते थे। अति प्राचीन काल में यह स्थान शासन की एक इकाई के रूप में प्रसिद्ध था। इस गढ़ से कुछ दूरी पर
नौलागढ़ है, जो पालवंशीय राजाओं के शासनकाल में एक प्रमुख प्रशासकीय इकाई था। किंवदंती बताती है कि जय मंगला गढ़ का निर्माण राजा मंगल सिंह द्वारा किया गया था, लेकिन इतिहास में इसका कोई प्रमाण नहीं मिलता है। प्रो. जयदेव झा ने अपने शोध-पत्र में यह सिद्ध किया है कि यहाँ भगवान बुद्ध भी आए थे और उनके आते ही यह संपूर्ण क्षेत्र बौद्ध धर्मावलंबी बन गया

धार्मिक आख्यान के अनुसार ब्रह्मावेदांत पुराण (प्रकृतिखंड) के चौवालीसवें अध्याय एवं देवी भागवत पुराण (नवम स्कंध) के सैंतालीसवें अध्याय में मंगला देवी का वर्णन है। इन दोनों धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आदिकाल में त्रिपुर दैत्य के वध करने के लिए भगवान विष्णु के कहने पर भगवान शिव द्वारा प्रार्थना के पश्चात् मंगला देवी प्रकट हुईं और उन्होंने त्रिपुर राक्षस का संहार किया। इसी समय वसहा के रूप में भगवान विष्णु को अवतरित होना पड़ा।

प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दक्ष यज्ञ ध्वंस के समय भगवान शिव अपनी पत्नी सती का शव लेकर चले तो जयमंगलागढ़ के मंदिर वाली जगह पर सती का एक स्तन गिर गया जिस कारण इसे सिद्ध शक्तिपीठ कहा जाने लगा।

कहते हैं, महाभारत काल में अंगराज कर्ण द्वारा मंगला देवी की पूजा किए जाने का भी प्रमाण मिलता है। कर्ण मुंगेर से गंगा नदी पार कर बूढ़ी गंडक नदी से नाव द्वारा यहाँ पहुँचकर मंगला देवी की पूजा करते थे। इस मंदिर का निर्माण भी
कर्ण द्वारा कराया गया ऐसा माना जाता है।

एक किंवदंती के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पूर्व इस इलाके के चमार जाति के एक हलवाहे द्वारा कावर झील स्थित खेत की जुताई की जा रही थी। हलवाहे के लिए उसकी बेटी भोजन लेकर खेत पर पहुँची। पिता ने खेत जोतने के बाद भोजन
करने की बात कही। भोजन करने में विलंब होने की बात जानकर वह लड़की उस द्वीप पर पहुँचकर विचरण करने लगी। हलवाहे ने खेत जोतने के बाद अपनी बेटी को पुकारा। बेटी के नहीं आने पर वह स्वयं द्वीप के जंगल में उसे खोजने लगा।
इसी खोजने के क्रम में वह आश्चर्यजनक दृश्य देखकर भय से काँप उठा।

अपनी बेटी को साक्षात् भगवती दुर्गा के रूप में एक बाघ पर बैठकर जंगल में उसे विचरण करते हुए उसने देखा। लड़की ने भी पिता को देखा। इसके बाद लड़की ने अपने पिता से कहा‘‘आपने आज मुझे इस रूप में देख लिया है। अतआज से मैं आपकी पुत्री नहीं रही।” इतना कहकर जयमंगलागढ़ स्थित मंगला देवी की मंदिर
में प्रतिष्ठापित मूर्ति में वह विलीन हो गई।

एक अन्य जनश्रुति के अनुसार देवासुर संग्राम के समय दैत्यराज ने इस देवी से विवाह करने की इच्छा प्रकट की। देवी ने एक ही रात में कावर झील के मध्य में एक मंदिर निर्माण कर देने की शर्त रखी। दैत्यराज इस शर्त को स्वीकार कर मंदिर निर्माण में जुट गया। निर्माण संबंधी नाममात्र का कुछ काम बाकी था कि सुबह होने को आईदैत्यराज शर्त हार चुका था। अतक्रोधित होकर उसने देवी का एक स्तन काट दिया और भाग खड़ा हुआ। देवी पत्थर की बन गईजिसे उसी मंदिर में प्रतिष्ठापित कर पूजा-पाठ प्रारंभ कर दिया गया।

यहाँ पर वर्षों पूर्व कृषकों द्वारा भूमि की खुदाई में महाभारत काल से लेकर पालवंश के शासनकाल तक ही सामग्री प्राप्त हुई है। प्रसिद्ध इतिहासकार स्व. डॉ. राधाकृष्ण चौधरी ने जयमंगलागढ़ पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि 14 कोसों में
फैले विशाल कावर झील के बीच लगभग 400 बीघे का यह द्वीप जंगलों से भरा था, जहाँ अनगिनत जंगली जानवरों के अलावा काफी संख्या में बंदर निवास करते थे। बंदरों की संख्या यहाँ इतनी अधिक थी कि मुंगेर जिला गजेटियर के अनुसार, तत्कालीन अंग्रेज शासकों ने जयमंगलागढ़ का नाम ‘वानर द्वीप’ (मंकी आइलैंड) रख दिया था।

अब आवश्यकता है कि इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए। आवागमन के साधन एवं मंदिर के चारों ओर एक सुंदर पुष्प उद्यान तथा प्रकाश की भी व्यवस्था होनी चाहिए।


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