Omkareshwar Jyotirlinga Temple History In Hindi : श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

Omkareshwar Jyotirlinga Temple History In Hindi : श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

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Omkareshwar Jyotirlinga Temple History In Hindi

Omkareshwar Jyotirlinga Temple History In Hindi : श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग


श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा है :

ॐकारेश्वर एक हिन्दू मंदिर है। यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता या शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक है, तीर्थ एवं पर्यटन की दृष्टि से अमरेश्वर काफी महत्त्वपूर्ण है। यह मध्य प्रदेश के पूर्वी निमाड़ जिले में पश्चिम रेलवे के ओंकारेश्वर रोड (मोटरक्का) रेलवे स्टेशन से 12 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा : 

अमरेश्वर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिग की उत्पत्ति की कथा रोचक है। प्राचीनकाल में देवर्षि नारदजी शिवोपासना करते हुए विंध्यगिरि पर पधारे। विंध्य पर्वत ने नारदजी का भक्तिभावपूर्ण अतिथि-सत्कार किया। विंध्य ने श्रद्धावनत होकर कहा “भगवान मेरा अहोभाग्य है कि आपकी कृपा से यहाँ किसी प्रकार की कमी नहीं है। मैं आपकी क्या सेवा करें ?”

विंध्य की अहंकार भरी बातें सुनकर नारदजी ने उसका अहंकार घटाने का निश्चय किया। वे क्रोध में आकर अपनी श्वास रोककर वहीं खड़े रहे। नारदजी के क्रोध रूप को देखकर विंध्य ने प्रश्न किया‘‘मुनिवरआप क्यों रुष्ट हैं? मुझसे कोई भूल हुई हो तो कहिए।”

विंध्य का वचन सुनकर नारदजी ने कहा ‘तुम्हारे यहाँ निश्चय ही किसी प्रकार की कमी नहीं है, किंतु तुम सर्वश्रेष्ठ नहीं हो, क्योंकि तुम्हारे शिखर सुमेरु पर्वत के शिखरों के समान देवलोक तक नहीं पहुँचते हैं।’ यह कहकर नारदजी चले गए।

नारदजी का इस प्रकार का कथन सुनकर विंध्य को अत्यंत आत्मग्लानि हुई तथा वह बहुत दु:खी हुआ और इस न्यूनता से मुक्ति पाने के लिए कोई उपाय सोचने लगाऔर अंत में इस निश्चय पर पहुँचा कि भगवान शंकर को प्रसन्न किया जाए। अपने निश्चय के अनुसार उसने शंकर की कठोर तपस्या की।

उसकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर आशुतोष भगवान शंकर ने विंध्य को अपने दर्शन दिए और अपने दिव्य स्वरूप का उसे दर्शन करायाजो देवता-मुनियों को भी महान् दुर्लभ था। भक्ति-विभोर होकर विंध्य ने शंकर से सभी सिद्धियाँ पूरी कर वर माँगा। शिवजी ने विंध्य की मनोकामना पूर्ण की।

कहते हैं, जिस स्थान पर विंध्य ने तपस्या की थी, उसकी प्राकृतिक रचना में ओम’ के आकार का पर्वत दृष्टिगत होता है और यथानाम तथागुण की लोकोक्ति को पूर्णतया चरितार्थ करता है। तभी से इस ज्योतिर्लिग का नाम ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग प्रसिद्ध हुआ।

श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है अद्भुत : 

विंध्य पर्वत का रोमांचक पर्वतीय क्षेत्र बरबस पर्यटकों का मन मोहता है। साथ ही इस पर्वत पर ओंकारेश्वर शिव मंदिर के अतिरिक्त ममलेश्वर महादेव का मंदिर भी है, जो नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित है। धर्मावलंबियों के लिए यह पवित्र स्थान है। ओंकारेश्वर के प्राचीन स्थान मार्कंडेय आश्रम पर अन्नपूर्णा मंदिर महाकाली, सरस्वती एवं दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ भगवान विष्णु के विराट् रूप दर्शन योग्य हैं। गौरी सोमनाथ से विख्यात यह शिव मंदिर अनेक किंवदंतियाँ अपने साथ जोड़े हुए है।

ओंकारेश्वर शिव मंदिर के ऊपर पहाड़ी पर स्थित राज परिवार की कुल देवी का सुंदर मंदिर है। इसके अलावा सिद्धनाथ मंदिर के बाहर बनी हुई बारह द्वारी कलात्मकता की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इन स्तंभों का सौंदर्य पत्थरों पर लिखी गई कविता के समान है। यहाँ नेमावर स्थित सिद्धनाथ मंदिर देश के इने गिने मंदिरों में से एक है। ओंकारेश्वर शिव मंदिर के दक्षिण तट पर मुख्य मंदिर के सामने दोनों ओर ब्रह्माविष्णु के मंदिर हैं, जो ‘ब्रह्मपुरी’ तथा ‘विष्णपुरी कहलाते हैं।

इसी क्षेत्र में गौमुख, त्रिशूल भेद कुंड, विज्ञानशाला तथा नया पुल स्थित हैं। यहाँ नर्मदा और कावेरी दोनों नदियाँ एक स्थान पर मिलकर संगम बनाती हैं। कावेरी नर्मदा में मिलने के बाद एक बार फिर अलग घेरा बनाती है और आगे चलकर फिर मिल जाती है। इससे बने टापू पर ही आशापुरी और सिद्धनाथ राजमहल स्थित हैं।

नर्मदा नदी के समीप पहुंचने पर प्राकृतिक दृश्यों का अनुपम सौंदर्यमत्स्य एवं अन्य जल जंतुओं की क्रीड़ाएँ देखकर नास्तिक के हदय में भी आस्तिकता के भाव जाग्र होने लगते हैं। पर्यटक एवं तीर्थयात्री यहाँ के दृश्य देकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। उनके ठहरने के लिए यहाँ धर्मशालाएँ भी हैं।

Omkareshwar Temple Timings : दर्शन समय

मंदिर खुलने का समय:
प्रातः काल 5 बजे – मंगला आरती एवं नैवेध्य भोग
प्रातः कल 5:30 बजे – दर्शन प्रारंभ

मध्यान्ह कालीन भोग:
दोपहर 12:20 से 1:10 बजे – मध्यान्ह भोग
दोपहर 1:15 बजे से – पुनः दर्शन प्रारंभ

सायंकालीन दर्शन:
दोपहर 4 बजे से – भगवान् के दर्शन

शयन आरती:
रात्रि 8:30 से 9:00 बजे – शयन आरती
रात्रि 9:00 से 9:35 बजे – भगवान् के शयन दर्शन

Omkareshwar Temple Timings : दर्शन हेतु नियम

  • विशेष पर्वों पर दर्शन सुविधाजनक बनने हेतु प्रातः छः बजे से ही जल दूध दही बिल्व पत्र प्रसाद तथा अन्य सामग्री चढाने पर प्रतिबन्ध लगाया जाता है. इसी प्रकार प्रतिदिन अपरान्ह चार बजे के बाद यह प्रतिबंधित है. श्रद्धालुओं से अपेक्षा है की वे इसका पालन करें. तथा पुजारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर इसके लिए दबाव ना डालें.
  • मंदिर प्रांगण में अभिषेक हेतु “अभिषेक हॉल” बनाया गया है, जहाँ पर पुजारियों द्वारा अभिषेक संपन्न करवाया जाता है. मंदिर कार्यालय एवं स्वागत कक्ष के सामने यह प्रतिबंधित है

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