माता -पिता का ऋण | Parents Hindi Stories

माता -पिता का ऋण | Parents Hindi Stories

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Parents Hindi Stories
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माता -पिता का ऋण

Hindi Story on Parents – Hindi Stories


स्वामी दयानंद सरस्वती मुरादाबाद में आर्यसमाज में प्रवचन कर रहे थे। किसी भक्त ने उनसे कहा ‘स्वामी जी यदि आप अपने कुछ सुयोग्य शिष्य तैयार करें, तो वैदिक-धर्म के व्यापक प्रचार का मार्ग प्रशस्त सकता है।

स्वामी जी ने गंभोर होकर कहा – ‘वत्स, इस जन्म में मुझे योग्य शिष्य मिलना कठिन है। उसी संन्यासी को अपना शिष्य बनाने का अधिकार है जो पितृ-ऋण से उऋण हो जाता है।

वैराग्य उत्पन्न होने पर मैं परिवार को छोड़ आया। अपने पूज्य माता-पिता की सेवा के अपने घर्म (कर्तव्य) का पालन न कर संन्यासी बन जाने के कारण कर्मफल योग्य शिष्य पाने में बाधा बना रहेगा।’

स्वामी जी के मुख से मातृपितृ ऋण का महत्त्व सुनकर वह भक्त उनके समक्ष नतमस्तक हो गया। उसने उसी दिन अपने माता-पिता की सेवा का संकल्प ले लिया


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