Sarnath Temple in Hindi : Sarnath Temple History in Hindi

0
37
Sarnath Temple in Hindi
Sarnath Temple in Hindi

भगवान बुद्ध से लेकर आज तक के करीब ढाई हजार वर्षों के उत्थान-पतन विकास और ह्रास के मूक साक्षी सारनाथ का खंडहर आज भी हमारे लिए विशेषकर बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए श्रद्धा और भक्ति का मुख्य केंद्र बना हुआ है। बौद्ध-धर्मावलंबियों के लिए जिन चार पवित्र स्थलों की परिक्रमा अनिवार्य मानी गई है, उनमें सारनाथ एक है।

Sarnath Temple in Hindi


Where is Sarnath Temple : सारनाथ मंदिर कहाँ है 

सारनाथ, उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर के निकट है, यह स्थान हिंदुओं की आद्य ऐतिहासिक नगरी वाराणसी से कोई आठ कि.मी. की दूरी पर है। बौद्ध-साहित्य में यह स्थल अपने प्राचीन नाम ‘इसीपत्तन’ या ‘ऋषिपत्तन’ या ‘मृगदाव’ से उल्लिखित हुआ है।

Sarnath Temple History in Hindi : सारनाथ मंदिर का इतिहास :

बौद्धग्रंथ ‘महावस्तु’ के अनुसार पाँच सौ बुद्ध या ऋषियों के शरीर निर्वाणोपरांत यहाँ गिरे थे। इसी कारण यह ‘ऋषिपत्तन’ कहलाया। कहते हैं, कभी बोधिसत्व स्वयं मृग रूप में यहाँ विचरण करते थे। उनके आत्म-बलिदान से द्रवित होकर
काशीराज ने यहाँ मृगों को अभयदान दिया था। इस कारण इसका दूसरा नाम ‘मृगदाव’ भी है।

पुरातत्वविद् कनिंघम सारनाथ को ‘सारंगनाथ’ का अपभ्रंश या संक्षिप्त रूप मानते हैं। जैनियों के तीर्थकर श्रेयांसनाथ के चार कल्याणकों के कारण यह अत्यंत प्रागैतिहासिक काल से ही जैनतीर्थ रहा है। जैनियों के अनुसार श्रेयांसनाथ के नाम
पर ही इस स्थान का नाम सारनाथ पड़ा। जैन साहित्य में ‘सिंहपुरी’ के नाम से भी इसका उल्लेख मिलता है। मध्यकालीन शिलालेखों में यह स्थल ‘धर्मचक्र’ या ‘सद्धधर्म चक्र परिवद्रन बिहारे’ नाम से वर्णित है।

यह नाम महात्मा बुद्ध द्वारा उन पंचवर्गीय भिक्षुओं को, जिन्होंने ‘उरुविल्ब’ में उन्हें पथ-भ्रष्ट समझकर साथ छोड़ दिया था, प्रथम धर्मोपदेश दिए जाने का सूचक है। आज से ढाई सौ वर्ष पूर्व अषाढ़ पूर्णिमा को यहीं से भगवान बुद्ध का धर्मचक्र प्रवर्तित हुआ था।

उनका मध्यम मार्गी, विश्व कल्याणकारी अष्टांग मार्ग तथा चार आर्य सत्यों का मांगलिक उद्घोष आसेतु हिमाचल भारतवर्ष में फैल गया।

सम्राट अशोक के शासनकाल में ‘ऋषिपत्तन’ काफी उन्नत अवस्था में था। स्वयं बौद्ध धर्म में दीक्षित होकर उसने अनेक स्तूप यहाँ निर्मित कराए।

स्थापत्य कला की दृष्टि से बौद्ध विहारों का अपना स्थान है। बौद्ध विहारों के अनेक खंडहर आज भी सारनाथ में विद्यमान हैं। इन विहारों में सर्वप्रसिद्ध धर्मचक्र जिन विहार है, जिसका निर्माण बारहवीं सदी में रानी कुमार देवी ने कराया था। इसकी रचना दक्षिण भारत के गोपुरों सदृश है। मृगदाव के मध्य स्वर्ण सदृश उज्ज्वल मूल गंधकुटीके नाम से प्रसिद्ध कभी यहाँ एक बौद्ध मंदिर था।

इसका वर्णन चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा विवरण में किया है। इस मंदिर के मध्य उस समय बुद्ध की एक स्वर्णिम मूर्ति थी। इसी से सटे 1931 . में एक मंदिर का निर्माण महाबोधि सोसाइटी ने कराया है। इसमें तक्षशिलानागार्जुन के कोंडा आदि स्थलों से प्राप्त बुद्धकालीन स्मृति-अवशेष सुरक्षित हैं। यहाँ के संग्रहालय में सुरक्षित कलात्मक वस्तुएँ तत्कालीन काशी के नागरिकों की परिष्कृत रुचि, कलाप्रेम तथा सौंदर्योपासना की सूचक हैं।

All information about Sarnath Temple in Hindi :

 

Sarnath Stambh : 

सारनाथ के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करते ही ईंटों का बना एक स्तूप मिलता है। यह स्तूप ‘चौखंडी’ नाम से प्रसिद्ध है। कहा जाता है, इसी स्थल पर पंच भद्रवर्गीय भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध का पहला उपदेश सुना था। इस स्तूप पर निर्मित अष्टकोणीय
शिखर अकबर द्वारा निर्मित बताया जाता है।

दूसरा प्रमुख स्मारक ‘धर्मराजिका’ स्तूप है, जिसका निर्माण मंजूषा में रखे बुद्ध के अवशेषों के ऊपर कराया गया था। 1794 ई. में काशी के राजा चेतसिंह के दीवान जगतसिंह के लोग इसे तोड़कर इसके मलबे को ले गए। उन्होंने इस स्तूप से प्राप्त संगमरमर की मंजूषा में रखे बुद्ध के अवशेषों को गंगा में फेंक दिया।

तृतीय सबसे बड़ा स्तूप ‘धर्मेष’ के नाम से जाना जाता है। यह गोलाकार स्तूप छियालिस मीटर ऊँचा और तीस मीटर चौड़ा है। इसपर विविध अलंकरण बने हैं। इसके ऊपर विविध प्रकार के फूलों की गोट बनी है। यह स्तूप कला की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Ashok Stambh :

मौर्यकालीन मूर्तियों में कला की दृष्टि से सबसे सुंदर अशोकस्तंभ का प्रसिद्ध शीर्ष है। इसकी ऊँचाई दो मीटर है तथा इसका आकार खिले कमल जैसा है। इसके ऊपर पीठ-से-पीठ सटाकर बैठे चार सिंहों की आकृतियाँ हैं। ऐसा लगता है, किसी समय अपने ऊपर ये धर्मचक्र को वहन करती थी। चारों सिंह अत्यंत ही प्रभावोत्पादक हैं। इसके चारों ओर क्रमश: वृषभ, हाथी, अश्व तथा सिंह की

आकृतियों को बड़ी सजीवता से उकेरा गया है। यही अभी भारत का राजचिह्न भी है। यहाँ की मूर्तियाँ इतनी सजीव व नेत्रग्राही हैं कि निर्माता की कला और निर्माण उपकरण पर दंग हो जाना पड़ता है।

सारनाथ की यात्रा :

बिड़ला द्वारा निर्मित धर्मशाला के अलावा पर्यटन विभाग की ओर से भी यहाँ रहने की उत्तम व्यवस्था है। बौद्ध धर्म के ह्रास के साथ सारनाथ भी विस्मृति के गर्भ में विलीन हो गया था, पर अब आवागमन आदि की सुविधा में वृद्धि होने के कारण पर्यटक भारी संख्या में यहाँ पहुँचने लगे हैं। चिंतक एवं साधक नित्यप्रति अपने श्रद्धा, सुमन कपिलवस्तु के उस मसीहा की स्मृति को अर्पित कर उसका ऋण स्वीकारते हैं।

बौद्ध तीर्थराज सारनाथ की यात्रा एक सुखद अनुभव है। सारनाथ बौद्धों का अद्वितीय महामठ ही नहीं, बौद्धों का मठराज है। सचमुच कितना भव्य, कितना पवित्र, कितना सुंदर, कितना संवेदनशील है सारनाथ मौर्यकला की उपलब्धियों का यह एक अत्यंत अविस्मरणीय, अद्भुत एवं अद्वितीय नमूना है।


दोस्तों हमारा यह पोस्ट भी हमारे Religious Places in India, Temple in Hindi का ही हिस्सा है, आगे भी हम आपको  Religious Places in India, Temple in Hindi में अनेक दुसरे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देते रहेंगें, अगर आपका कोई सवाल है तो आप Comment Box में लिखकर हमें भेज सकते है

If you like Sarnath Temple in Hindi : Sarnath Temple History in Hindi, its request to kindly share with your friends on FacebookGoogle+Twitter, Pinterest and other social media sites

दोस्तों ऐसे अच्छे Post लिखने में काफी समय लगता है, आपके comments से हमारा Motivation Level बढ़ता है आप comment करने के लिए एक मिनट तो निकाल ही सकते है

LEAVE A REPLY