Shri Vitthal Aarti – श्री विट्ठल आरती

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Shri Vitthal Aarti in Marathi – श्री विट्ठल आरती


येई हो विठ्ठले माझे माऊली ये ॥
निढळावरी कर ठेऊनी वाट मी पाहे ॥

आलिया गेलीया हातीं धाडी निरोप ॥
पंढरपुरी आहे माझा मायबाप ॥

येई हो विठ्ठले माझे माऊली ये ॥
निढळावरी कर ठेऊनी वाट मी पाहे ॥

पिंवळा पीतांबर कैसा गगनी झळकला ॥
गरुडावरी बैसून माझा कैवारी आला

येई हो विठ्ठले माझे माऊली ये ॥
निढळावरी कर ठेऊनी वाट मी पाहे ॥

विठोबाचे राज आम्हां नित्य दिपवाळी ॥
विष्णुदास नामा जीवेंभावे ओंवाळी ॥

येई हो विठ्ठले माझे माऊली ये ॥
निढळावरी कर ठेऊनी वाट मी पाहे ॥


श्री विठोबाची आरती – Shri Vithoba Aarti

युगें अठ्ठावीस विटेवरी उभा। वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा।
पुण्डलिकाचे भेटी परब्रह्म आलें गा। चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥

जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा।
रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥

तुळसीमाळा गळां कर ठेवुनि कटीं। कांसे पीताम्बर कस्तुरि लल्लाटी।
देव सुरवर नित्य येती भेटी। गरुड हनुमन्त पुढे उभे राहती॥

जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा।
रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥

धन्य वेणुनाद अनुक्षेत्रपाळा। सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळां।
राही रखुमाबाई राणीया सकळा। ओवाळिती राजा विठोबा सांवळा॥

जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा।
रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥

ओवाळूं आरत्या कुर्वण्ड्या येती। चन्द्रभागेमाजी सोडुनियां देती।
दिंड्या पताका वैष्णव नाचती। पंढरीचा महिमा वर्णावा किती॥

जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा।
रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥

आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती। चन्द्रभागेमाजी स्नाने जे करिती।
दर्शनहेळामात्रें तयां होय मुक्ती। केशवासी नामदेव भावे ओंवाळिती॥

जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा।
रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥


Shri Vitthal Aarti in Hindi – श्री विट्ठल आरती

जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी ।
कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी ॥

मोर मुकुट और काने कुण्डल, उर वैजयन्ती माला जी ।
नासिका गज मोती सोहे, ए छबि जोवा जइये जी ॥

आसपास तो गऊ बिराजे, गवाल मण्डली साथे जी ।
मुख थी व्हालो वेणु बजावे, ए छबि जोवा जइये जी ॥

वल्लभ दुर्लभ जग में गाये, तो भवसागर तर जायें जी ।
माधवदास तो इतना मांगें, जन्म गोकुल में पाएं जी ॥

जय श्री गिरिधर, जय श्री गोविन्द, जय श्री बालकृष्ण जी ।
जय श्री गोकुलपते, जय श्री रघुपति, जय श्री यदुपति, जय श्री घनश्याम जी ॥

श्री गोकुलवारे नाथ जी, मेरी डोर तुम्हारे नाथ जी ।
जय यमुना श्री गोवर्धन नाथ, महाप्रभु श्री विट्ठलनाथ ॥

जय जय श्री गोकुलेश,
शेष ना रहे क्लेश ।

श्री वल्लभ जुग जुग राज करो,
श्री विट्ठल जुग जुग राज करो ।

श्री वल्लभ विट्ठल गोपीनाथ,
देवकी नन्दन श्री रघुनाथ ।

श्री यशोदानन्दन नन्दकिशोर,
श्री मुरलीधर माखनचोर ।

सूरदास कृष्णदास जी,
परमानन्ददास कुंभन दास जी ।

चतुर्भुज नन्ददास जी,
छीतस्वामी शी गोविन्द जी ।

श्री वल्लभ देव की जय,
प्राणप्यारे की जय ।

श्री गोवर्धन नाथ की जय,
चौरासी वैष्णव की जय ।

दो सौ बावन भगवदीयन की जय,
अष्टसखान की जय ।

समस्त वल्लभकुल की जय,
समस्त वैष्णवन की जय ।


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